श्री नित्यानन्द स्वामी जयंती समारोह*
परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य, आशीर्वाद व उद्बोधन*
स्व श्री नित्यानन्द स्वामी जी की 97 वीं जयंती के अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले महानुभावों को किया सम्मानित*
वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से माननीय मुख्य अतिथि के रूप में श्री पुष्कर सिंह धामी जी, मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड ने किया सहभाग*
माननीय पूर्व राज्यपाल एवं पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड़ श्री भगत सिंह कोश्यारी जी, माननीय सांसद राज्यसभा श्री नरेश बंसल जी, माननीय पूर्व कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड़, श्री प्रेमचन्द्र अग्रवाल जी, माननीय विधायक, विकासनगर, श्री मुन्ना सिंह चैहान जी, माननीय राष्ट्रीय सचिव, समाजवादी पार्टी, श्री एस एन सचान जी, समाज सेवी, श्री हरि शंकर जोशी जी, श्री खजानदास जी, विधायक, श्री सहदेव सिंह पुंडीर जी, विधायक और अनेक विशिष्ट अतिथियों का पावन सान्निध्य*
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स्वच्छ राजनीतिज्ञ सम्मान, श्री महेंद्र भट्ट, माननीय सांसद, राज्यसभा, उत्तराखंड गौरव सम्मान, पद्मश्री डा यशोधर मठपाल जी, अन्तराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पुरातत्वविद्, चिकित्सा सेवा अलंकरण, पद्मश्री डा आर के जैन जी, संस्थापक सीएमआई हाॅस्पिटल, उद्योग अलंकरण, श्री अशोक विंडलास, प्रवर्तक, विंडलास बायोटेक लिमिटेड, सांस्कृतिक संपदा अलंकरण, श्री सुरेश जोशी जी, संस्थापक मसकबीन स्टूडियो, शिक्षाविद् अलंकार, डा कमल घनशाला जी, संस्थापक अध्यक्ष, ग्राफिक एरा ग्रुप, व्यापार अलंकरण, श्री अनिल गुप्ता जी एवं श्री सुरेश गुप्ता जी, डायरेक्टर, सुविधा सुपर मार्केट, समाज सेवा अलंकरण, श्री प्रेम प्रकाश शर्मा जी, समाज सेवी, पर्यावरण अलंकरण, श्री मोहन चंद्र कांडपाल जी, जल योद्धा, ललितकला अलंकरण, श्री दिनेश लाल जी, शिल्पी आदि महानुभावों को किया सम्मानित*
*इस विशेष कार्यक्रम में अध्यक्ष, डा आर के बक्शी जी, उपाध्यक्ष ज्योत्सना शर्मा जी, सचिव, राहुल अग्रवाल जी, संरक्षक, डा एस फारूख जी, अध्यक्ष युवा संगठन-जय, श्री विनायक शर्मा स्वामी जी, उपाध्यक्ष-जय, प्रेरणा गुलाटी जी, उपाध्याक्ष-जय, नितिका शर्मा जी, आकाश सिंह महर, जी, सचिव-जय*।
देहरादून।आध्यात्मिक चेतना, सेवा-भाव और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों को समर्पित स्व. श्री नित्यानन्द स्वामी जी की 97वीं जयंती के पावन अवसर पर एक भव्य एवं प्रेरणादायी समारोह का आयोजन किया गया। यह गरिमामयी आयोजन परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य, आशीर्वाद एवं उद्बोधन से अभिसिंचित हुआ। समारोह में माननीय मुख्यमंत्री उत्तराखण्ड, श्री पुष्कर सिंह धामी जी ने मुख्य अतिथि के रूप में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से सहभाग किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चारण, दीप प्रज्वलन एवं स्व. श्री नित्यानन्द स्वामी जी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। वातावरण श्रद्धा, भक्ति और कृतज्ञता से ओतप्रोत था। उपस्थित संतगण, विद्वान, समाजसेवी, प्रशासनिक अधिकारी एवं श्रद्धालुओं ने स्वामी जी के जीवन और उनके द्वारा समाज को दी गई अमूल्य शिक्षाओं को स्मरण किया।
इस अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि देवभूमि उत्तराखंड का सौभाग्य है कि “स्व. श्री नित्यानन्द स्वामी जी उसे प्रथम मुख्यमंत्री के रूप में प्राप्त हुये। वे एक विचारधारा थे, उनका जीवन सादगी, सेवा, सत्य और समर्पण का जीवंत उदाहरण था। उन्होंने आध्यात्मिकता को केवल साधना तक सीमित नहीं रखा, बल्कि समाज, राष्ट्र और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व निभाना ही सच्ची साधना है।”
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि आज के समय में स्वामी नित्यानन्द जी के आदर्श युवाओं के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। यदि युवा उनके दिखाए मार्ग पर चलें तो एक सशक्त, संस्कारवान और समरस उत्तराखंड का निर्माण संभव है।
समारोह के दौरान स्व. श्री नित्यानन्द स्वामी जी की स्मृति में विभिन्न क्षेत्रों, जैसे शिक्षा, समाज सेवा, चिकित्सा, पर्यावरण संरक्षण, संस्कृति, कला और जनसेवा में उत्कृष्ट योगदान देने वाले महानुभावों को सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन व्यक्तित्वों को समर्पित था जिन्होंने निस्वार्थ भाव से समाज के उत्थान हेतु कार्य किया।
सम्मान समारोह में उपस्थित सभी सम्मानित व्यक्तित्वों ने इस अवसर को अपने जीवन का गौरवपूर्ण क्षण बताते हुए कहा कि यह सम्मान उन्हें और अधिक सेवा कार्य करने की प्रेरणा देगा। कार्यक्रम में संत समाज ने एक स्वर में यह संदेश दिया कि सेवा ही सच्ची साधना है और मानवता की सेवा ही ईश्वर की सेवा है।
कार्यक्रम के अंत में सामूहिक प्रार्थना एवं शांति पाठ का आयोजन किया गया, जिसमें विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्र की समृद्धि और मानव कल्याण की कामना की गई। पूरा वातावरण अध्यात्म, करुणा और सकारात्मक ऊर्जा से आलोकित हो उठा।
स्व. श्री नित्यानन्द स्वामी जी की 97वीं जयंती का यह समारोह न केवल एक स्मृति कार्यक्रम था, बल्कि यह एक संकल्प था, उनके आदर्शों को जीवन में उतारने का, सेवा और संस्कार के माध्यम से समाज और राष्ट्र को सशक्त बनाने का।
