बागेश्वर पीठाधीश्वर, आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी का परमार्थ निकेतन में आगमन*
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी की दिव्य भेंटवार्ता*
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी ने वेदमंत्रों के साथ किया गंगा पूजन*
श्रीराम लला प्रतिष्ठा-2026 की देशवासियों को शुभकामनायें*
आगामी सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव का दिया पावन निमंत्रण*
स्वामी जी ने बागेश्वर धाम कैंसर अस्पताल, मेडिकल एंड साइंस रिसर्च इंस्टीट्यूट की प्रगति के विषय में ली जानकारी लेते हुये कहा यह बुन्देलखंड के लिये सबसे बड़ा उपहार जो भविष्य में अस्पताल लाखों लोगों के लिए आशा की किरण बनेगा*
ऋषिकेश, 22 जनवरी। परमार्थ निकेतन, में आज बागेश्वर पीठाधीश्वर, श्रद्धेय आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी का पावन आगमन हुआ। परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने शंखध्वनि, वेदमंत्र और पुष्प वर्षा के साथ आचार्य श्री का स्वागत आत्मीयता, सरलता और आध्यात्मिक ऊष्मा के साथ किया। 
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी के मध्य दिव्य भेंटवार्ता अत्यंत प्रेरक, सारगर्भित और युगबोध से परिपूर्ण रही। इस संवाद में सनातन धर्म की जीवंतता, युवा पीढ़ी को आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता, राष्ट्र की सांस्कृतिक चेतना और सेवा को साधना बनाने के भाव पर गहन मंथन हुआ। दोनों संतों ने कहा कि आज के समय में आध्यात्मिकता से तात्पर्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक आशा, स्वास्थ्य, संस्कार और सम्मान पहुँचाना है।
इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी को श्रीराम लला प्रतिष्ठा-2026 के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि 22 जनवरी भारत की आत्मा, अस्मिता और सनातन चेतना के पुनर्जागरण का महापर्व है। उन्होंने कहा कि श्रीराम भारत के प्राण हैं, मर्यादा, करुणा, धर्म और राष्ट्रभक्ति के शाश्वत प्रतीक हैं। श्रीराम लला प्रतिष्ठा का यह दिन देशवासियों के जीवन में सद्भाव, एकता और नैतिक बल को और अधिक सुदृढ़ करेगा।
आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी ने भी स्वामी जी के मार्गदर्शन और परमार्थ निकेतन की वैश्विक सेवा-यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि ऋषिकेश केवल योग और साधना की भूमि नहीं, बल्कि मानवता को दिशा देने वाला आध्यात्मिक प्रकाशस्तंभ है। उन्होंने कहा कि स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का जीवन स्वयं एक चलता-फिरता तीर्थ है, जो सेवा, समर्पण और संकल्प की प्रेरणा देता है।
इस दिव्य अवसर पर आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी ने आगामी सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव का पावन निमंत्रण स्वामी जी को प्रदान किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि सामूहिक कन्या विवाह जैसे आयोजन सनातन संस्कृति की सामाजिक संवेदनशीलता और करुणा का जीवंत उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन निश्चित रूप से निर्धन परिवारों की बेटियों को सम्मान और सुरक्षा देता है, साथ ही समाज में समरसता और सहयोग की भावना को भी सशक्त करेगा।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने इस अवसर पर बागेश्वर धाम कैंसर अस्पताल, मेडिकल एंड साइंस रिसर्च इंस्टीट्यूट की प्रगति के विषय में विस्तार से जानकारी ली। आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री जी ने अस्पताल की वर्तमान स्थिति, भावी योजनाओं और सेवा-उद्देश्य से अवगत कराया। स्वामी जी ने इसे बुन्देलखंड के लिए “सबसे बड़ा उपहार” बताते हुए कहा कि यह अस्पताल आने वाले समय में लाखों लोगों के लिए आशा की किरण बनेगा। उन्होंने कहा कि जहाँ एक ओर आध्यात्मिकता आत्मा को बल देती है, वहीं स्वास्थ्य सेवा शरीर को संबल प्रदान करती है और जब दोनों का संगम होता है, तब सच्चा राष्ट्रनिर्माण होता है।
स्वामी जी ने कहा कि बागेश्वर धाम कैंसर अस्पताल केवल एक चिकित्सा संस्थान नहीं, बल्कि करुणा, सेवा और संकल्प की जीवंत अभिव्यक्ति है। यह उस सनातन सोच का प्रतीक है जहाँ “नर सेवा ही नारायण सेवा” को जीवन का मूल मंत्र माना गया है। उन्होंने आचार्य शास्त्री जी के इस प्रयास को युगांतरकारी बताते हुए कहा कि यह पहल आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगी।
पूरे कार्यक्रम के दौरान परमार्थ निकेतन का वातावरण “जय श्रीराम”, “हर हर गंगे” और “भारत माता की जय” के उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।
