वसंत पर्व की पूर्व संध्या पर लाखों दीपों से जगमगाया शताब्दी नगर
सनातन संस्कृति के विकास के लिए सतत कार्य करते रहना चाहिए: स्वामी गोविन्ददेव गिरि जी
संस्कृति की रक्षा से ही सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित: श्री राजनाथ सिंह

हरिद्वार।बैरागी द्वीप पर आयोजित शताब्दी समारोह में गुरुवार की संध्या वसंत पर्व की पूर्व बेला में आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो उठी। लाखों टिमटिमाते दीपों की आलोक-श्रृंखला से पूरा शताब्दी नगर जगमगा उठा। इस अवसर पर आयोजित भव्य दीपमहायज्ञ में अखिल विश्व गायत्री परिवार की प्रमुख श्रद्धेया शैलदीदी की गरिमामयी उपस्थिति रहीं। वे विगत सौ वर्षों से सतत प्रज्वलित गायत्री तीर्थ शांतिकुंज की अखण्ड दीप की अग्नि लेकर समारोह स्थल पहुंचीं।
दीपमहायज्ञ के मुख्य अतिथि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविन्ददेव गिरि जी महाराज ने कहा कि वे गायत्री परिवार के कार्यों से पिछले सत्तर वर्षों से अधिक समय से परिचित हैं। उन्होंने युगऋषि पूज्य पं. श्रीराम शर्मा आचार्य के कई साहित्यों का अनेक बार अध्ययन किया है, जो व्यक्ति और समाज निर्माण की सशक्त दिशा प्रदान करता है। स्वामी गोविन्ददेव गिरि जी ने कहा कि हमें अपने भीतर ऐसी जाग्रत मानसिकता विकसित करनी चाहिए, जिससे भारत माता और सनातन संस्कृति के संरक्षण व विकास के लिए निरंतर कार्य करते रहने की प्रेरणा मिलती रहे। उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक व्यक्ति अपने अंतःकरण में ऐसी दिव्य ज्योति प्रज्वलित करे, जो राष्ट्र के उत्थान और सांस्कृतिक पुनर्जागरण में सहभागी बने। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार हजारों गुरुकुल (प्रज्ञा संस्थान) तैयार कर विश्व को जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।

इस अवसर पर केन्द्रीय रक्षामंत्री श्री राजनाथ सिंह वर्चुअल जुडे़ और स्वयंसेवकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार का मानवता के विकास के लिए किया जा रहा कार्य अतुलनीय है। संस्कृति की रक्षा से ही सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित है। उन्होंने कहा कि पं0 श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने व्यक्ति की चेतना तक पहुँचने का कार्य किया। उन्होंने सिद्ध किया कि विज्ञान और अध्यात्म एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। इससे पूर्व शताब्दी समारोह के दलनायक डॉ चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि वैदिक परंपरा की वास्तविक आधारशिला अंतःकरण में निहित विश्वास, निष्ठा, समर्पण, संवेदना और संकल्पना को जागृत करना है। उन्होंने कहा कि दीप महायज्ञ केवल एक अनुष्ठान नहीं, बल्कि खंड-खंड में बिखरी चेतना को अखंड ज्योति में रूपांतरित करने की जीवन साधना है। इस माध्यम से पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य ने जीवन रत्नों सदाचार, सेवा और कर्तव्यबोध का संदेश जन-जन तक पहुँचाया। यही प्रक्रिया व्यक्ति निर्माण से युग परिवर्तन की दिशा प्रशस्त करती है।
इस अवसर पर केन्द्रीय रक्षामंत्री श्री राजनाथ सिंह वर्चुअल जुडे़ और स्वयंसेवकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि गायत्री परिवार का मानवता के विकास के लिए किया जा रहा कार्य अतुलनीय है। संस्कृति की रक्षा से ही सीमा की सुरक्षा सुनिश्चित है। उन्होंने कहा कि संस्कारवान व्यक्ति ही संस्कार, संस्कृति की सुरक्षा कर सकता है और इस कार्य को गायत्री परिवार व देवसंस्कृति विवि बखूबी कर रहा है।
इस अवसर पर महिला मण्डल की प्रमुख श्रीमती शैफाली पण्ड्या, पद्मश्री डॉ सुनील जोगी, उत्तराखण्ड सरकार में सचिव श्री रविशंकर जी, श्री कैलाश कुमार आदि अनेक गणमान्य नागरिक सहित उपस्थित रहे।
